#HumanStory: ‘बच्चों की आत्माएं उनकी ही तरह जिद्दी होती हैं, जल्दी मानती नहीं’

दक्षिणी दिल्ली (South Delhi) की उस पार्किंग (parking) में एक के बाद एक कई सुसाइड (suicide) हुए. प्रॉपर्टी मालिक ने हमें बुला भेजा. वहां अक्सर एक नन्ही-सी छाया घूमती दिखती. इंफ्रारेड कैमरे (infrared camera) में भी वो आई. पता चला वहां एक बच्चे की मौत (death) हुई थी. वो खेलना चाहता था, लोग डर जाते थे. बच्चों की आत्माएं (spirit) अक्सर जिद्दी होती हैं. आसानी से नहीं जातीं.

#HumanStory: 'बच्चों की आत्माएं उनकी ही तरह जिद्दी होती हैं, जल्दी मानती नहीं'
7 सालों से आत्माओं पर ‘तहकीकात’ कर रहे हैं वकार

वकार राज का पेशा है आत्माओं की खोज (ghost hunting). पैरानॉर्मल एक्टिविटी इनवेस्टिगेटर (paranormal activity investigator) का काम कर रहे वकार कहते हैं- आत्माएं अपने होने का कोई न कोई संकेत देती हैं. जैसे फुल बैटरी दिखाता मोबाइल एकदम से लो हो जाए, कैमरा खराब हो जाए, लाइट बंद हो जाए या खटखटाने या दूसरी तरह की आवाजें होने लगें.

पढ़ें, सात साल से आत्माओं पर ‘तहकीकात’ कर रहे वकार को.

साल 2014 की बात है. तब तक 25 से ज्यादा मामलों पर काम कर चुका था. कहीं कुछ नहीं मिला. यकीन था कि भूत-प्रेत बेकार की बात है. तभी कुलधरा जाने का मौका मिला. जैसलमेर के पास एक जगह. रेत के समंदर में 3 किलोमीटर के दायरे में फैले इस गांव को हॉन्टेड गांव (haunted village) कहते हैं. कहते हैं करीब 200 साल पहले कुलधरा और इसके आसपास के 84 गांववाले रातोंरात गायब हो गए. तब से ये गांव कभी बसा नहीं. कभी किसी ने कोशिश की तो उसे तुरंत भागना पड़ा. हमारी टीम साजो-सामान के साथ वहां पहुंची. हम एक TV शो का हिस्सा थे. मेरी टीम सेटअप करके शूट में लगी थी. मैंने तकनीकी चीजें चेक कीं और अकेला घूमने लगा.

सुनसान गलियां. खंडहर हो चुकी ढाणियां. मेरे पास एक कैमरा, एक टॉर्च और वॉकीटॉकी था. घूमते हुए एक छोटे से घर में जा घुसा. मिट्टी का वो घर अंधेरे का हिस्सा हो चुका था.

शायद वहां लंबे वक्त से कोई घुसा नहीं था. मकड़ी के जाले और चमगादड़ यहां-वहां दिख रहे थे. मैं मौज में था. यकीन था कि कुछ नहीं मिलेगा. चिल्लाकर हवा से बातें करने लगा- अगर कोई है तो अपने-आप को दिखाओ वरना मैं जा रहा हूं. मेरा ये कहना था कि K2 मीटर एकदम से हवा में उठ गया. मैं कुछ समझ पाता, उससे पहले जोरों की आवाज हुई और लकड़ी का दरवाजा बंद हो गया.

वो आत्माओं का मुझे पहला इशारा था. उसके बाद से अब तक 15 सौ से ज्यादा जगहों पर पैरानॉर्मल चीजों की खोज में जा चुका हूं. कहीं थे, कहीं हौआ बनाया गया.

कुलधरा और इसके आसपास के 84 गांववाले रातोंरात गायब हो गए

अक्सर घरों के मालिक हमें ‘भूत भगाने’ के लिए बुलाते हैं. 

कई बार स्कूलों, पार्क, सड़क के किसी खास हिस्से, गोदाम में भी पैरानॉर्मल चीजें दिखती हैं और हमें बुलाया जाता है. ऐसे ही एक बार एक पार्किंग में घोस्ट हटाने के लिए पहुंचे. वहां कई नाइट गार्ड्स ने खुदकुशी की थी. हिस्ट्री चेक की तो पता चला कि वहां एक बच्चे की बड़ी तकलीफ में मौत हुई थी. वो गार्ड्स के साथ खेलना चाहता था और डरे हुए गार्ड्स अपने ही डर के कारण मर रहे थे.

अगले रोज हम फिर वहां पहुंचे. इस बार बॉल और खिलौने लेकर गए थे. बॉल खेली जाने लगी. खिलौने मूव करने लगे.

मैंने बच्चे की आत्मा से बात करने की कोशिश की. उसे वहां से जाने के लिए मनाने की कोशिश. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. पूजा-पाठ भी हुआ लेकिन कुछ दिनों बाद फिर एक्टिविटीज शुरू हो गईं. बच्चों की आत्मा अमूमन बड़ी जिद्दी होती हैं. और उतनी ही नासमझ भी. आप जो भी कहें, वो समझ ही नहीं पाती हैं.

पूरी उम्र में मौत हो तो आत्मा शांत रहती है. उसे कोई लालच नहीं होता और वो अपनी दुनिया में लौट जाती है. किसी ट्रॉमा में मौत हो तो अक्सर वहां पैरानॉर्मल हरकतें देखी जा सकती हैं.

लोग हमपर अक्सर सवाल उठाते हैं. कहा जाता है कि हम अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं. हकीकत इससे उलट है. हम विज्ञान और खासकर फिजिक्स के नियमों पर काम करते हैं.

कई उपकरण हैं जो घोस्ट डिटेक्टर का काम करते हैं. मिसाल के तौर पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड डिटेक्टर. इससे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्रीक्वेंसी चेक करते हैं. ये फ्रीक्वेंसी उन तमाम जगहों पर होती है, जहां भी मोबाइल टावर या स्ट्रॉग वाईफाई राउटर या सड़क के नीचे तार जा रहे हों. बस फर्क ये है कि उन जगहों पर फ्रीक्वेंसी स्थिर होती है, जबकि जहां आत्माएं हों, वहां ये बदलती रहती है. बार-बार ब्लिंक करती है.

अब तक 15 सौ से ज्यादा जगहों पर पैरानॉर्मल चीजों की खोज में जा चुका हूं (प्रतीकात्मक फोटो)
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