इन 10 सरकारी बैंकों का आपस में हुआ विलय, जानें आपके अकाउंट और पैसे का क्या होगा?

10 सरकारी बैंकों के विलय से खाताधारकों पर कोई असर नहीं होगा लेकिन इन बैंकों के अकाउंट होल्डर्स के लिए थोड़ा काम जरूर बढ़ जाएगा.

इन 10 सरकारी बैंकों का आपस में हुआ विलय, जानें आपके अकाउंट और पैसे का क्या होगा?
10 सरकारी बैंकों के विलय से खाताधारकों पर कोई असर नहीं होगा लेकिन इन बैंकों के अकाउंट होल्डर्स के लिए थोड़ा काम जरूर बढ़ जाएगा.

वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बैंकिंग सिस्टम (Bankig System) में सुधार के लिए बड़े कदम उठाए हैं. वित्त मंत्री ने 10 सरकारी बैंकों (PSU Bank) के विलय की घोषणा की है. बैंकों के विलय के बाद बैंकों के कई ब्रांच बंद होंगे और नए ब्रांच खुलेंगे. बैंकों के विलय का असर इन बैंकों के ग्राहकों पर भी होगा. 10 सरकारी बैंकों के विलय से खाताधारकों पर कोई असर नहीं होगा लेकिन इन बैंकों के अकाउंट होल्डर्स के लिए थोड़ा काम जरूर बढ़ जाएगा. इस फैसले से आम ग्राहकों को कई काम करने पड़ सकते हैं. आइए जानें बैंकों के विलय से ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी बैंकों का 88 फीसदी बिजनेस इन कंसॉलिडेटेड बैंकों के साथ है. क्षेत्रीय बैंकों के मजबूत कामकाज को देखते हुए इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एंड सिंध बैंक अपना कामकाज पहले की तरह करते रहेंगे. 2017 में 27 सरकारी बैंक थे. अब सरकारी बैंकों की संख्या सिर्फ 12 रह गई है. देश को 5 लाख करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है.

ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?

(1) ग्राहकों को नया अकाउंट नंबर और कस्टमर आईडी मिल सकता है.

(2) जिन ग्राहकों को नए अकाउंट नंबर या IFSC कोड मिलेंगे, उन्हें नए डीटेल्स इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, इंश्योरंस कंपनियों, म्यूचुअल फंड, नैशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) आदि में अपडेट करवाने होंगे.

(3) SIP या लोन EMI के लिए ग्राहकों को नया इंस्ट्रक्शन फॉर्म भरना पड़ सकता है.


(4) नई चेकबुक, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड इशू हो सकता है.

(5) फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) या रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) पर मिलने वाले ब्याज में कोई बदलाव नहीं होगा.

(6) जिन ब्याज दरों पर वीइकल लोन, होम लोन, पर्सनल लोन आदि लिए गए हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं होगा.

(7) कुछ शाखाएं बंद हो सकती हैं, इसलिए ग्राहकों को नई शाखाओं में जाना पड़ सकता है.

(8) मर्जर के बाद एंटिटी को सभी इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस (ECS) निर्देशों और पोस्ट डेटेड चेक को क्लीयर करना होगा.

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